पिलर की ओट में, सत्यजीत और संवि के बीच का तनाव अब एक ऐसी हद पार कर चुका था जहाँ मर्यादा का कोई स्थान नहीं था। सत्यजीत ने संवि के चेहरे को अपनी हथेलियों के बीच मजबूती से जकड़ा, उसकी आँखों में एक ऐसी अंधी वासना थी जो संवि के भीतर के डर को भी उत्तेजना में बदल रही थी।




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