तपस्या के बदन पर चढ़ी उस हवस और नशे की खुमारी अब इस कदर हावी हो चुकी थी कि उसका दिमाग पूरी तरह सुन्न पड़ चुका था। वह होश खो बैठी थी। गुस्से, लाचारी और उस गंदे नशे में चूर होकर उसने अचानक किसी खूंखार जानवर की तरह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और अंश की गर्दन को अपने नुकीले नाखूनों से इतनी बेरहमी से नोच डाला कि वहाँ से खून की बारीक धारें बह निकलीं।
यह खौफनाक नजारा देखकर कमरे में खड़े बाकी तीनों भाई सन्न रह गए। उन्होंने एक-दूसरे की तरफ देखा और हैरान होकर अपने सिर हिला दिए कि इस लड़की का दिमाग पूरी तरह फिर चुका है।




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